तेलुगु फिल्मों के जाने माने अभिनेता चंद्रमोहन (chandra mohan death) के शनिवार को हुए निधन से साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। 80 साल के चंद्र मोहन लंबे समय से बीमार थे और उनका जुबिली हिल्स से अपोलो अस्पताल में कुछ दिनों से इलाज चल रहा था लेकिन आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
चंद्र मोहन के निधन की खबर से साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में शोक व्याप्त है। उनको दिल की बीमारी थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी जलंधरा और दो बेटियां हैं। चंद्रमोहन का अंतिम संस्कार सोमवार को हैदराबाद के एलुंडी में किया जायेगा।
23 मई 1943 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पमिदिमुक्कला गांव में जन्में चंद्रमोहन ने 1966 में आई बीएन रेड्डी की फिल्म ‘रंगुला रत्नम’ से डेब्यू किया था। उनका असली नाम चंद्रशेखर राव मल्लमपल्ली था।
श्रीदेवी, जयाप्रदा और जयासुधा सहित कई नामी एक्टर्स के साथ काम कर चुके चंद्रमोहन दिग्गज फिल्ममेकर के विश्वनाथ के चचेरे भाई हैं।
वैसे तो चंद्रमोहन को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये तमिलनाडु का सर्वोच्च सम्मान समेत कई अवॉर्ड मिले थे लेकिन ‘पदाहारेला वायसु’ के लिए मिला था फिल्मफेयर अवॉर्ड का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड उनके कैरियर की बड़ी उपलब्धि रही. चंद्रमोहन को 1987 में आई फिल्म ‘चंदामामा रावे’ के लिए नंदी पुरस्कार मिला था। बाद में फिल्म अथानोक्कडे के लिए उन्हें सहायक अभिनेता का भी अवॉर्ड मिला। फिल्म 7/जी बृंदावन कॉलोनी में उन्होंने हीरो के पिता की भूमिका निभाई थी। चंद्रमोहन की आखिरी फिल्म 2017 में आई ऑक्सीजन थी। उन्होंने तेलुगु टीवी सीरियल गंगाटो रामबाबू में भी काम किया था। उन्होंने कई तामिल फिल्मों में भी कामं किया।
अपनी पहली फिल्म की सफलता के बाद चंद्रमोहन के सामने ये दुविधा थी कि क्या उन्हें फिल्मों में काम करना चाहिये या सरकारी नौकरी? लेकिन वो फिल्मों में लगे रहे। कई अच्छी फिल्में आई हैं जिनमें सिरी सिरी मुव्वा, सुभोदयम, सीतामलक्ष्मी, पदहरेला वयासु आदि, लेकिन फिल्में छोड़ने से पहले वो एक फिल्म, एक अच्छी चरित्र भूमिका करना चाहता थे जो उनके इर्द-गिर्द हो और पूरी संतुष्टि दे ।
फिल्मों में आने के बाद भी उनकी जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया।' कई कड़वे पल आए. मनसंथा नुव्वे की शूटिंग के दौरान चंद्रमोहन की मां गंभीर रूप से बीमार थीं। हालांकि भारी नुकसान होने के अंदेसे से वो उनके पास नहीं रह सके और उनके अंतिम समय में उनके साथ नहीं थे।
साउथ फिल्म इंडस्ट्री शोकाकुल
चंद्र मोहन के निधन की खबर से साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में शोक व्याप्त है। उनको दिल की बीमारी थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी जलंधरा और दो बेटियां हैं। चंद्रमोहन का अंतिम संस्कार सोमवार को हैदराबाद के एलुंडी में किया जायेगा।
आजादी से पहले जन्में थे चंद्रमोहन
23 मई 1943 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पमिदिमुक्कला गांव में जन्में चंद्रमोहन ने 1966 में आई बीएन रेड्डी की फिल्म ‘रंगुला रत्नम’ से डेब्यू किया था। उनका असली नाम चंद्रशेखर राव मल्लमपल्ली था।
श्रीदेवी, जयाप्रदा और जयासुधा सहित कई नामी एक्टर्स के साथ काम कर चुके चंद्रमोहन दिग्गज फिल्ममेकर के विश्वनाथ के चचेरे भाई हैं।
कई अवार्ड्स मिले
वैसे तो चंद्रमोहन को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये तमिलनाडु का सर्वोच्च सम्मान समेत कई अवॉर्ड मिले थे लेकिन ‘पदाहारेला वायसु’ के लिए मिला था फिल्मफेयर अवॉर्ड का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड उनके कैरियर की बड़ी उपलब्धि रही. चंद्रमोहन को 1987 में आई फिल्म ‘चंदामामा रावे’ के लिए नंदी पुरस्कार मिला था। बाद में फिल्म अथानोक्कडे के लिए उन्हें सहायक अभिनेता का भी अवॉर्ड मिला। फिल्म 7/जी बृंदावन कॉलोनी में उन्होंने हीरो के पिता की भूमिका निभाई थी। चंद्रमोहन की आखिरी फिल्म 2017 में आई ऑक्सीजन थी। उन्होंने तेलुगु टीवी सीरियल गंगाटो रामबाबू में भी काम किया था। उन्होंने कई तामिल फिल्मों में भी कामं किया।
ऐसा था चंद्रमोहन का जीवन
अपनी पहली फिल्म की सफलता के बाद चंद्रमोहन के सामने ये दुविधा थी कि क्या उन्हें फिल्मों में काम करना चाहिये या सरकारी नौकरी? लेकिन वो फिल्मों में लगे रहे। कई अच्छी फिल्में आई हैं जिनमें सिरी सिरी मुव्वा, सुभोदयम, सीतामलक्ष्मी, पदहरेला वयासु आदि, लेकिन फिल्में छोड़ने से पहले वो एक फिल्म, एक अच्छी चरित्र भूमिका करना चाहता थे जो उनके इर्द-गिर्द हो और पूरी संतुष्टि दे ।
फिल्मों में आने के बाद भी उनकी जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया।' कई कड़वे पल आए. मनसंथा नुव्वे की शूटिंग के दौरान चंद्रमोहन की मां गंभीर रूप से बीमार थीं। हालांकि भारी नुकसान होने के अंदेसे से वो उनके पास नहीं रह सके और उनके अंतिम समय में उनके साथ नहीं थे।
